गुजर जाता है वक़्त पर वक़्त गुजरता नहीं ठहर जाता मन वही पर वहाँ से कभी हटता नहीं अब तुम ही बताओ जरा ऐसा होता है तो क्यों होता है वैसा क्यों होता नहीं जो चाहों वो पाओ दिल क्यों अटका रहता है वहीं.... सीमा असीम 8,2,26
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बिखरना
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हम अक्सर बिखरी हुई चीजों को समेटने में खुद इतना बिखर जाते हैं की संभल ही नहीं पाते इसलिए जो बिखर गया है उसे बिखर जाने दो क्योंकि कभी-कभी बिखरी हुई चीजें सुंदर लगती हैं अच्छी लगती हैं प्यारी लगती हैं जैसे की बिखरी हुई नदी जैसे कि पहाड़ जैसे की आकाश बिखरे हुए खेत जंगल अगर इनको समेट देंगे तो उनकी सुंदरता चली जाएगी इसीलिए बिखरी हुई चीजें भी कभी-कभी अच्छी लगती हैं है ना हम बिखरे हुए हैं और तुम भी तो बिखरे हुए हो पर अच्छा है ना... सीमा असीम सक्सेना 31,1,26