अपनी तारीफ़ खुद ही करते हो गलत को भी सच साबित करते हो कितने स्वार्थी हो तुम अब समझी हूं एक चेहरे पर कई चेहरे लगाया करते हो उफ्फ ऐसे हो तुम क्यों नहीं जाना पहले शर्म न लिहाज जरा भी तुम्हें क्या झूठ को सच क्यों बनाते फिरते हो काश कि आए थोड़ी तो लिहाज तुम्हें अपनी गलतियों का अहसास हो तुम्हें।।
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तेरा पेट वाकई बहुत बड़ा है कभी भरता ही नहीं है खूब लुटा जी भरकर तन मन और धन से फिर हाथ पाँव काट कर दूर फेंक देता है कि तुझे कभी छू तक न न पाए बड़ा बेशर्म शख्स है किसी भी बात का कोई असर नहीं है हो भी कैसे आखिर तेरे संस्कार ही यही हैं न बर्बाद करना और खुद ख़ुशी मनाना लेकिन याद रखना उसकी लाठी बेआवाज होती है जो ऊपर बैठा सब देख है याद रखना उसके दरवार में देर जरुर है पर अंधेर बिलकुल भी नहीं तू भी रोयेगा और तेरे आंसूं पोछने वाला कोई नहीं होगा खून के आंसू रोयेगा तू जैसे तूने आँखों में भरे हैं हमारे किसी को दगा देने का मतलब एक दिन जरुर समझ आ जायेगा तुझे जब तू तडपेगा गिद्गिदायेगा पर ढाढ़स बढाने वाला दूर दूर तक कोई नहीं होगा तब शायद हमारी रूह को तसल्ली मिलेगी और तुझे भी अहसास होगा किसी को यूँ दगा देकर धोखा देकर बर्बाद कर देना क्या अंजाम होता है ..... असीम
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छल कपट प्रपंच से अगर किसी को अपना बना लिया तो क्या फायदा बनाना है अगर किसी को अपना तो उसका दिल जीत कर दिखाओ माना कि हो तुम बहुत धुँर्न्धर किसी का भी दिल और मन तोड़ देने में कभी तो बहते हुए मेरे आंसुओं को जरा तुम पोंछ कर तो दिखाओ तब नजर आयेगी तुम्हारे इंसान होने की इंसानियत जरा सी ही सही आकर अपने किये वादे और अपना फर्ज निभा कर तो दिखाओ असीम