कहाँ जाओगे तुम दूर मुझसे कभी
जब नस नस में हो तुम ही बसे
याद करने की जरूरत नहीं मुझे
भुलाए नहीं जा सके हो कभी
अश्कों में दिखता है अक्स तेरा
नहीं गिरने देती गालों से नीचे कभी
पल पल में नाम तेरा जुबान पर
पुकारने लगता है जब चाहें कभी
नहीं जरुरत अब तन की मुझे
समाये हो तुम ऐसे मुझमें कहीं......
सीमा असीम
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