तेरा पेट वाकई बहुत बड़ा है
कभी भरता ही नहीं है
खूब लुटा जी भरकर
तन मन और धन से
फिर हाथ पाँव काट कर
दूर फेंक देता है
कि तुझे कभी छू तक न न पाए
बड़ा बेशर्म शख्स है
किसी भी बात का कोई असर नहीं है
हो भी कैसे आखिर तेरे संस्कार ही यही हैं न
बर्बाद करना और खुद ख़ुशी मनाना
लेकिन याद रखना उसकी लाठी बेआवाज होती है
जो ऊपर बैठा सब देख है
याद रखना उसके दरवार में देर जरुर है
पर अंधेर बिलकुल भी नहीं
तू भी रोयेगा
और तेरे आंसूं पोछने वाला कोई नहीं होगा
खून के आंसू रोयेगा तू
जैसे तूने आँखों में भरे हैं हमारे
किसी को दगा देने का मतलब
एक दिन जरुर समझ आ जायेगा तुझे
जब तू तडपेगा गिद्गिदायेगा
पर ढाढ़स बढाने वाला दूर दूर तक कोई नहीं होगा
तब शायद हमारी रूह को तसल्ली मिलेगी
और तुझे भी अहसास होगा किसी को यूँ
दगा देकर धोखा देकर बर्बाद कर देना
क्या अंजाम होता है .....
असीम
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