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आज भी नींद आंखों से गायब हो चुकी थी, दूर-दूर तक कहीं नींद का नामोनिशान नहीं था, ना जाने अब कैसे नींद आएगी? क्या करूं नाज़मा को जगा लूँ? नहीं नहीं रहने दो बेचारी अभी तो सोई है, क्या करूं? चलो म्यूजिक सुनती हूं मन को सुकून आएगा, मोबाइल पर यूट्यूब ऑन किया और रिलैक्सिंग म्यूजिक लगा दिया, मेरे ईयर फोन कहां है? बिना ईयर फोन के सुनूंगी तो यह सब लोग भी जग जायेंगी, ओ हो अब यह फोन कहां ढूंढू? लाइट भी ऑन नहीं कर सकती, हां हिना के ईयर फोन यहीं बेड पर ही पड़े होंगे, वही लगा लेती हूं वह अभी गाने सुन रही थी ना ईयर फोन लगाकर, उसने हाथ से टटोलकर देखा, तकिए के नीचे ही उसके ईयर फोन पड़े हुए थे, मोबाइल पर ईयर फोन लगाकर उसने म्यूजिक ऑन कर दिया, अनुष्का शंकर का सितार वादन वाला म्यूजिक मन को बड़ा सुकून और आराम दे रहा था फिर पता नहीं कब नींद आ गई पता ही नहीं चला...
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तुम्हारी हंसी ------------------------- न जाने कितना छुपा होता है दर्द हमारी हंसी में हमारी मुस्कान में जहां मर्म है संवेदना है वहां हंसी भी है। हम हंसते हैं मुस्कुराते हैं तो चमकने लगता है हमारा चेहरा जैसे धुला-धुला सा बिल्कुल साफ और पवित्र। ऐसी ही है तुम्हारी हंसी भी तुम जब हंसती हो खिल जाता है जैसे तुम्हारा पोर-पोर तुम्हारे चेहरे की खाल को पतला कर देती है तुम्हारी हंसी तुम्हारी मुस्कुराहट। जब हंसती हो तुम परिंदे जैसे उड़ने लगते हैं आसमान में खुशी से। तुम्हारी धिमि हंसी तुम्हारी धिमि मुस्कुराहट लगती है बिलकुल नरम, मुलायम जैसे डूबी हो ओस की नमी में। आंखें गीली-सी हो जाती हैं खुशी से जब तुम हंसती हो खिलखिलाकर बिल्कुल पागलों-सी तब हंसी जैसे थिरकती रहती पल भर वहीं पर तुम्हारे आसपास। कभी तुम्हारी हंसी तुम्हारी मुस्कुराहट स्वतः स्फूर्त होती जैसे निःसृत हो रही हो तुम्हारे भ...
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मैं तुम पर बहुत ज्यादा विश्वास करती हूं हद से ज्यादा कोई एक बात भी अपने मन में नहीं रखती सारी बातें मैं तुमसे कह देती हूं दिल में कुछ रहता ही नहीं है मेरे तुम्हारे सिवा कुछ यहां तक कि जो भी बात मुझसे कोई कुछ कहता है वह भी मैं तुम्हें बता देती हूं मैं कभी कुछ तुमसे छुपाना ही नहीं चाहती मैं बार-बार तुम्हें जताना चाहती हूं लेकिन जब तुम मेरे विश्वास को ठेस पहुंचाते हो उसे झूठ बोलते हो कोई भी एक बात वह चीज मुझे रुलाती रहती है बरसो बरसो दिन रात सुबह दोपहर जब भी वह चीज भी रहती है दिल में और वह मुझे रुलाती है कि तुमने मुझसे झूठ बोला..मुझे सच भी तो कह सकते थे हर बार वही झूठ को अधूरा ना बार-बार उसे झूठ को कहना इतनी सफाई के साथ कहना मैंने तो तुमसे कभी कोई सफाई नहीं मांगी तुम अगर मुझे कोई बात बता भी रहे हो तो सच बताओ झूठ बताने का क्या मतलब बनता है उसे छुपाने का क्या मतलब बताएं मैं तो तुमसे पैसे भी हमेशा ही तुम्हारी हूं तुम्हें प्रेम करती हूं हद से ज्यादा करती हूं कोई नहीं कर सकता इतना तुम्हें प्रेम पवित्र और सच्चा प्रेम उसमें नाम मात्र को भी कोई मिलावट नहीं है प्रेम में इतना पारदर...