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प्रेम

 जहाँ प्रेम है वहाँ सुख है ख़ुशी है जहाँ सुख है ख़ुशी है वहाँ है प्रेम प्रेम क्षणभंगूर नहीं अनंत काल की यात्रा है  एक जीवन में कहाँ पूरा होता है प्रेम  न जाने कैसे कर लेते हैं लोग छोटे से जीवन में किसी से  घृणा प्रेम नफ़रत और  जरा देर में बदल लेते हैं अपनी भावनाओं को वो कब समझेंगे क्या होता है प्रेम न कहने से न सुनने से अहसासों की भाषा है यह आत्मा से आत्मा का मिलना है प्रेम फूल इंद्रधनुष बारिश ओस देख मुस्कुरा देता है मन भोला भोला मासूमियत से भरा होता है प्रेम प्रेम करते हैं सभी जीवन में एक बार जरूर जो निभा ले सच्चे मन से वहां ईश्वर बन जाता है प्रेम!! सीमा असीम 

बर्फ़

 यूँ तो निकलती है धूप  हल्की हल्की कभी कभी   इन सर्दियों के दिनों में  और गिरती है बहुत ज्यादा बर्फ  जो जम जाती है  धूप के निकलने से  चटकती है फिर थोड़ी-थोड़ी पर   पिघलती नहीं जल्दी फिसलन पैदा करती है...  पर अच्छी लगने लगती है यह बर्फ़ ये ठिठुरन यह सर्दियां इस सर्द मौसम में  नर्म कोमल धूप की  गरमाहट से भरकर ... Limitless limitless 6,2,21
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अटूट विश्वास

 उदास होने से दुखी होने से रोने से  खुशियां वापस नहीं लौटती हैं  अगर खुशियां आनी हैं तो  वह अपने आप से आपके पास आ जाएंगी और सारा कुछ  दे जाएंगी   जिसको आपने सोचा भी नहीं होगा आप  वह पा जाओगे जो  आपने कभी सपने में उम्मीद भी नहीं की होगी  एक विश्वास होना चाहिए  अटूट विश्वास  बस अगर आपके पास विश्वास है  तो दुनिया की कोई भी ताकत  आपको आपके सपने से दूर नहीं कर सकती  आपकी खुशियों से दूर नहीं कर सकती  बस हर काम के लिए आप विश्वास बनाए रखो  उम्मीद जगाई रखो  कभी भी उदास नहीं होना न दुखी  और ना ही कभी नाउम्मीद ... सीमा असीम  2,2,21 

दर्द

 जब मन अकुलाता  है तो आंखों से बरस जाता है  न जाने कैसी हूक सी उठती है पेट में  फिर कुछ भी समझ में नहीं आता है  बस रोता ही रहता है समझता ही नहीं किसी भी हाल समझता ही नहीं ना जाने कितनी देर तक रोता रहता है सुबकता रहता है किसी की कोई बात याद आती है उसके वह शब्द जो हमारे दिल को दुख देते हैं  या उसकी वे बातें जो बार-बार दिल में दर्द पैदा करती है और हम रोते रहते हैं समझते ही नहीं है समझ आता ही नहीं है होता है होता है ऐसा अक्सर ही होता है मेरे साथ... क्यों दुखाते हैं दिल लोग आपका,क्यों कहते हैं ऐसी बातें जिससे आपके दिल को चोट पहुंचती है? क्यों करते हैं वे काम वे बातें जो आपको अच्छी नहीं लगती और जिसको देखकर आप अपने आप को संभाल नहीं पाते तब सिर्फ रोना ही आपके बस में रह जाता है... और फिर आप हल्के हो जाते हो और माफ कर देते हो उसे बिना कुछ कहे ही... सीमा असीम 1,2,21

तिलक

 हटो हटो हटो दूर हटो, रात को कोई तिलक लगाता है जाओ जाओ किसी और के लगाओ, हम नहीं लगाते तिलक रात को!  बुरी तरह से झिड़क दिया था उस छोटे से मासूम बच्चे को एक गरबीले, घमंडी,नकचढे इंसान ने, यह देखते ही मेरे मन में एक अजीब सी बेचैनी सी पैदा हो गई उस बच्चे के लिए मन में दर्द भरा आया और आंखों में हल्की सी नमी भर गई!  कोई ऐसा कैसे कर सकता है किसी के मन में किसी के प्रति इतना दुर्भाव कैसे हो सकता है? क्या गलती है उसकी वो माथे पर तिलक ही तो लगाना चाहता है जब आप रात को मंदिर जा सकते हो तो तिलक रात को क्यों नहीं लगा सकते अनेकों सवाल मेरे मन में उमड़ने लगे!  वह भी तो एक इंसान ही है, माना कि वह इतना सक्षम नहीं है तुम्हारी तरह धन दौलत से भरपूर नहीं है तुम्हारी तरह, लेकिन खाता तो वह भी रोटी ही है, हो सकता है  जो तुम मक्खन या घी में भिगोकर रोटी खाते हो और वह नमक से सूखी रोटी खाकर गुजर कर लेता है!  सुबह ही निकल पड़ता होगा चंदन की कटोरी लेकर के मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं के माथे पर तिलक लगाकर कुछ पैसे कमा लेगा, हर कोई पैसे कमाता है कोई  पैसे तिजोरी भरने को कमाता है और...