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Showing posts from February, 2025

तुम

 तुम जब आँखों को बंद करते होंगे  नज़र तो सिर्फमैं ही आती होऊंगी  खोलकर आँखों को भी नज़र से  तुम्हारी दूर कहाँ होती होऊंगी  करते होंगे तुम चाहें जितना जतन  पलभर को भी न निजात मिलती होंगी  कहो तो मैं तुम्हें न याद करूँ  पर यह बात न मुझसे होंगी  कि भूलने को तुम्हें मैं याद न करूँ  अब तो यह आदत है मेरी और तुम्हारी भी  कि न तुम मुझे दूर कर पाते हो  न ही मैं भुला पाती हूँ  अजीब सी कोई दास्तां बन रही है  कि गुल कोई कमाल का खिलेगा  यादों को बना कर ताबीज सा  जो पहना दिया है तुमने  उसमें अब तुम ही बंध गये हो  चाह कर भी नहीं मिलेगी मुक्ति  और भी ज्यादा जकड़ गये हो  बस यही तो है सच और सच्चाई भी न..... सीमा असीम  28,2,24

याद

 न जाने कितनी राते हैं मेरी  तुम्हें याद करते हुए गुजर जाती है  जानती हूं कि तुम मेरे हो और सिर्फ मेरे ही हो  क्योंकि मन जिसके पास है बस वही तो उसका अपना है  मेरा मन हमेशा तुम्हारे पास है और  तुम्हारा मेरे पास  ऐसा हो ही नहीं सकता कि  मेरा मन तुम्हारे पास लगा रहे और  तुम्हारा मेरी तरफ ध्यान ही ना जाए  कितना घबराहट होती है  दिन भर में कितनी ही बार  जाकर तुम्हें देख लेती हूं और  फिर मन को समझ लेती हूं  कभी दो बूंद आंखों से छलका लेती हूं और  अपनी आंखों की जलन को मिटा लेती हूं  अक्सर ऐसा होता है कि पल भर को  भूलने की कोशिश करती हूं पर  मेरी कोशिश हमेशा नाकाम हो जाती है और  तुम्हारी याद मेरे मनमस्तिष्क पर कब्जा जमा लेती है और   तुम्हें, मेरा और मुझे तुम्हारा बनाए रखती है  यूँ ही सदा  या जन्मों जन्मान्तरों के लिए... सीमा असीम  27,2,25

तुम ही तो

 सुनो कि मैं तुम्हें याद करती हूँ  कि अटक से गए हो मेरे हृदय में  एक आवाज एक पुकार आती है और  अंतर मन से टकराकर मस्तिष्क में गूंजती हुई फिर  वापस हृदय में समा जाती है  मैं तुम्हें देखती हूं ख्वाबों में   अपने अदृश्य मन से  ख्वाबों भरी आंखों से  हर वक्त अपने आस-पास मैं महसूस करती हूं तुम्हें  बिल्कुल अपने करीब और  मैं तुम्हें सुनती हूं तुम्हारी आवाज को  जो गूंजती है ब्रह्मांड में  सिर्फ तुम्हें ही तो  तुम्हारे सिवा और किसी को  कहाँ याद करती हूं और  मैं किसका नाम लेती हूं और  मैं किसे पुकारती हूँ  सिर्फ तुम ही तो हो  जो बसे हो  मेरे हृदय में  मेरे अंतर मन में  और  मेरी आत्मा में  तुम ही  सिर्फ तुम ही  सीमा असीम 

प्रेम

 शायद हम प्रेम भी आजकल  व्यापार की तरह करने लगे हैं  वीकेंड मनाते हैं  डेट पर जाते हैं  वैलेंटाइन डे मनाते हैं  वेलेंटाइन वीक भी मनाते हैं  टेडी डे  चॉकलेट डे कितनी ही तरह के डे हम मनाते हैं लेकिन  क्या हम सच में दिल से प्रेम निभा पाते हैं  क्या प्रेम सिर्फ चॉकलेट देने से  टैडी देने से हो जाता है  या गले लगाने से  चुम लेने से प्रेम होता है  या फिर हम किसी से वादा कर देते हैं  तो क्या उससे भी प्रेम हो जाता है  शायद हम प्रेम को समझ ही नहीं पाते  शायद हमने प्रेम को कभी समझ ही नहीं  तभी तो हम देने लेने में इतना खो जाते हैं कि प्रेम की गरिमा को भूल जाते हैं  प्रेम क्या है  कैसे हैं  क्यों होता है  नहीं जानते हैं  अगर हम जानते तो हम गहराई में उतर जाते और  उसे अपने अंतर मन से निभाते  जन्म जन्म तक  क्योंकि प्रेम एक जन्म के लिए नहीं होता  प्रेम तो एक ऐसी भावना है अगर  आपके मन में घर कर जाए तो  वह कभी खत्म ही नहीं होती और  अगर खत्म हो जाए तो  श...

असीम अनंत

 प्रेम को लिखना इतना आसान नहीं होता है  प्रेम को करना भी इतना आसान नहीं होता है  प्रेम एक ऐसी चीज है जिसे आप जितना करोगे या  इसमें जितना डुबोगे और डूबते ही चले जाओगे और  जितना ऊबरोगे उतना ही उभरते चले जाओगे  प्रेम में सिर्फ डूबना ही नहीं होता  प्रेम में उबरना भी होता है कि  अगर प्रेम में डूब कर न उबरे तो  वह प्रेम ही नहीं और  जो ऊबर के फिर से प्रेम में न डू बे तो  प्रेम ही नहीं  प्रेम डूबने और उभरने का ही तो एक खेल है बस   प्रेम बस एक खेल ही है जो मन से संचालित होता है और  मन तक जाता है  कि जब साथ रहो तो प्रेम होता है असीम और  जब दूर हो जाओ तो अनंत हो जाए  सच में प्रेम की माया अनोखी है  अलग है  न्यारी है  इसे कोई नहीं समझ सकता  ना तुम ना हम  बस असीम और अनंत के रंग है प्रेम में... सीमा असीम  8,2,25
 सुनीता जी भजन में तालीम होने के बाद उठी आहत हो गई थी आ गए हैं इतने सालों से सॉन्ग में रहते हुए शायद भी आहट सी पहचान जाती थी पानी का गिलास लेकर सामने आकर खड़ी होगी और उनको इस हालत में देखकर बोली अरे क्या हो गया आपको तबीयत खराब है और इतनी देर कैसे हो गई मैं थोड़ी घबराहट भर कर में बोले अरे नहीं ऐसा कुछ नहीं है तबीयत नहीं खराब है बस काम का थोड़ा वर्क लोड ज्यादा था इस वजह से देर भी हो गई और तक भी गया हूं बहुत थोड़ा रेस्ट करना चाहता हूं अब आपकी तबीयत सही नहीं रहती है बच्चे भी मना करते हैं छोड़ दो हम नौकरी इतने सालों तक कर लिया ना अब बच्चे भी अब सेटल हो ही गई है और मुझे भी ज्यादा किसी चीज की जरूरत नहीं है जो है उसी में गुजर कर लेंगे मुझे अपना ख्याल रखो और जल्दी से सही हो जाओ अरे क्या बात लेकर बैठ गई जब तक हाथ पर चल रहे हैं तब तक तो काम करना ही चाहिए ना वैसे भी अभी मेरी नौकरी के पूरे 6 साल बचे हुए हैं घर में रहकर भी क्या करूंगा कभी-कभी हो जाता है रोज तो लेना चलो ठीक है तुम चाय बना कर लो मैं मुंह धो कर आता हूं चाय पियेंगे फिर मैं आराम करूंगा अतुल थोड़ा सा नॉर्मल होते हुए बोला करना वह समझा ...