माथे से टपकती हुई पसीने को पहुंचकर एक तरफ से रखते हुए अतुल ने नजरे उठाकर समुद्र की तरफ देखा कितना शोर करता है यह समुद्र लेकिन इससे तो कहीं ज्यादा उसके मन में इस समय हाहाकार मचा हुआ है संभलता नहीं है तभी तो किनारे पर जाकर अपना सर पटकता है और फिर वापस लौट जाता है सच में इस मानसिक पीड़ा को सहन बहुत मुश्किल हो रहा है समझ नहीं आ रहा क्या किया जाए कैसे समझाएं मां को इतनी बेचैनी कभी भी नहीं हुई जब ऑफिस में मन नहीं लगता अक्सर इधर ही आकर बैठ जाता हूं लेकिन आज तो करीब 5 घंटे हो गया ऐसे ही बैठे हुए फिर भी मन को और भी बेचैन होता जा रहा है अपनी कलाई घड़ी की तरफ देखा शाम के 7:00 बज रहे हैं लोगों की भीड़ में बढ़ने लगी है तो मां और भी वह तो शांति की तलाश में यहां चला आता है और जब मन शांत हो जाता तब फिर वापस लौट जाता आज की बात ही अलग है लेकिन क्या कर सकता है चलो घर चलते हैं वहां पर सुनीता इंतजार कर रही होगी परेशान हो रही होगी लेकिन उसकी एक ही आदत बहुत अच्छी है कि वह कभी फोन करके डिस्टर्ब नहीं करती अपने और कामों में लग जाती है उसे पता है कि जब अतुल को देर होने लगती है या किसी काम में फंस जाता है तो वह खुद ही उसे बता देता है कितनी अच्छी है सुनीता इतना ख्याल रखती है उसका हर समय हर बात पर वही तो उसका एक धन है और उसे कुछ चाहिए भी तो नहीं फिर क्यों इतना मन बेचैन हो रहा है तुमने सोचा 35 साल पहले जब भी इस शहर में आए थे तब रहे और सुनीता दो ही लोग तो थे फिर बाद में दोस्त 4 साल के बाद बच्चे आए और मैं बड़े हुए समझदार हुए और अपनी-अपनी दिशाओं को निकल गए और अतुल दोनों अकेले जहां से शुरू किया वहीं पर आकर रुक गए अपने गांव से हजारों मील दूर वह इस शहर में मां की बेचैनी को दूर करने ही तो आए थे खुद को भुला देने को पिछली बातें सब बातों को अपने मन से निकाल देने को लेकिन आज वहीं परिस्थितियों फिर सामने आकर खड़ी हो गई कहते भी है ना पृथ्वी गोल है स्कूल सच कहते हैं इसमें कोई झूठ नहीं है तभी तो हम जिस परिस्थिति से निकलते हैं लौट के उसे स्थिति में जरूर पहुंच जाते हैं एक दिन अतुल उठकर खड़ा हुआ उसने अपने कपड़ों पर लगी रेट को झाड़ा और जूते को रेत में  हुए धीरे-धीरे चलकर उसे रेट के s चलो टैक्सी कर लेता हूं  बस सामने ही लोकल का स्टेशन है लेकिन आज चलने की बिल्कुल भी इच्छा नहीं है बस लग रहा है कहीं बैठ जाओ बस भी मिल जाएगी परंतु बस का तो टाइम फिक्स है किस समय आएगी और इतना दूर भी नहीं है वॉकिंग करते हुए भी तो घर पहुंच सकता है वह मुश्किल से ढाई किलोमीटर होगा अक्सर को सुबह के समय तैरता हुआ यहां समझ के किनारे तक आता है पर आज तो बात ही अलग है मां के यहां आकर ने उसके शरीर को भी बेचैन कर रखा है अतुल ने सामने से आई हुई टैक्सी को हाथ देखकर रोका और उसे काली पीली टैक्सी में सवार होकर घर की तरफ निकल गया घर के दरवाजे खुले हुए थे शायद सुनीता अभी दरवाजे पर ही खड़ी हुई होगी अंदर चला गया जूते एक साइड में रखकर देखा सुनीता भजन कर रही है और टीवी पर भगवान का सत्संग चल रहा है सुनीता का बस यही एक काम बचा है जब वह करके कामों से फ्री हो जाती है तो टीवी के आगे कभी सत्संग सुनती है कभी भजन सुनती है शायद यह उम्र का ही तक आज होता है की मां उसी तरह से बन जाता है जैसे-जैसे उम्र बढ़ती जाती है ईश्वर की तरफ झुकाव होने लगता है 

सुनीता जी भजन में तालीम होने के बाद उठी आहत हो गई थी आ गए हैं इतने सालों से सॉन्ग में रहते हुए शायद भी आहट सी पहचान जाती थी पानी का गिलास लेकर सामने आकर खड़ी होगी और उनको इस हालत में देखकर बोली अरे क्या हो गया आपको तबीयत खराब है और इतनी देर कैसे हो गई मैं थोड़ी घबराहट भर कर में बोले अरे नहीं ऐसा कुछ नहीं है तबीयत नहीं खराब है बस काम का थोड़ा वर्क लोड ज्यादा था इस वजह से देर भी हो गई और तक भी गया हूं बहुत थोड़ा रेस्ट करना चाहता हूं अब आपकी तबीयत सही नहीं रहती है बच्चे भी मना करते हैं छोड़ दो हम नौकरी इतने सालों तक कर लिया ना अब बच्चे भी अब सेटल हो ही गई है और मुझे भी ज्यादा किसी चीज की जरूरत नहीं है जो है उसी में गुजर कर लेंगे मुझे अपना ख्याल रखो और जल्दी से सही हो जाओ अरे क्या बात लेकर बैठ गई जब तक हाथ पर चल रहे हैं तब तक तो काम करना ही चाहिए ना वैसे भी अभी मेरी नौकरी के पूरे 6 साल बचे हुए हैं घर में रहकर भी क्या करूंगा कभी-कभी हो जाता है रोज तो लेना चलो ठीक है तुम चाय बना कर लो मैं मुंह धो कर आता हूं चाय पियेंगे फिर मैं आराम करूंगा अतुल थोड़ा सा नॉर्मल होते हुए बोला करना वह समझा पता अपने मन की परेशानी को सुनीता के सामने रख पाता सुनीता तो वैसे भी बहुत जल्दी घबरा जाती है सही कह रही है उसके तो ज्यादा खर्च भी नहीं है इतनी कम चीजों में उसका गुर्जर हो जाता है कभी कोई डिमांड ही नहीं करती उसके मन में कभी किसी चीज की इच्छा ही नहीं जाती आज के समय में भी ऐसी महिलाएं होती है क्या जबकि अनीता की उम्र की ही अन्य महिलाएं पार्लर जाती हैं क्लब जाती हैं घूमती फिरती है हाथी पीती है अकेले ही सब इंजॉय कर लेते हैं सुनीता है कि अगर इसी घर के कामों से फुर्सत मिलती है तो भजन कीर्तन करते रहती है मन को शांत करने के लिए अतुल जी अब थोड़े से मुस्कुराए कितनी शालीन पत्नी मिली है उसे कभी सोचा ही नहीं था कि सुनीता जैसी बीवी उसकी जिंदगी में आ जाएगी उसने अपनी पसंद की भी तो नहीं है कि तुम मां बाप ने अपनी पसंद से करवा दी थी उसकी शादी वैसे मां-बाप ने जो भी सोच अच्छा ही सोच अगर मैं उसे वक्त शादी नहीं करते तो इतना जाने वह क्या ही ना कर लेता शायद खुद को ही खत्म कर देता इस बात का ख्याल आते ही उसका मन फिर उन्हें उलझन में उलझने लगा था लेकिन अपने सर को झटका देकर उठा और बाथरूम की तरफ चला गया फ्रेश होकर आया तब तक सुनीता ने चाय और घर के बने हुए चिप्स मेज पर लाकर रख दिए थे 

 अनीता को पता है कि अतुल को चिप्स बहुत पसंद है इसलिए मैं घर में ही बनती है और जब वह शाम को चाय बनती है तो उसे समय भूल कर उसे पर काली मिर्च और नमक डालकर दे देती है पेट भी भर जाता है और चाय के साथ कुछ खाने को भी हो जाता है क्योंकि अतुल को बाजार की नमकीन और बिस्किट पसंद नहीं है वह भी तो नहीं खाती है बाजार की आलतू फालतू चीज 

 अतुल चेहरे पर दिखाओ की मुस्कुराहट ऑन थी जिसे सुनीता परेशान ना हो कोई मुस्कुराते ही सुनीता से बोले तुम्हें मेरी हर बात की बहुत फिक्र रहती है सुनीता तुम्हें पता है की चिप्स मेरी कमजोरी है उसी दिन तुम चिपस गुण कर रख देती हो और मेरा मन अच्छा कर देती हो मेरी पत्नी को निभाना तो पड़ेगा और आज से नहीं 30 साल हो गए साथ में रहते हुए इतने दिन तुम मां-बाप के साथ भी नहीं गुजरे मैंने मैं तुम्हारे साथ रह रही हूं और तुम जैसी ही तो हो गई हो शायद तुम मेरे जैसे हुए या नहीं कहते हुए हो चुप हो गई 

 इस बात को सुनकर तुम चुप हो गया था सच में सुनीता तो उसके जैसी हो गई क्या वह संगीता जैसा हो पाया क्या वह अभी भी उन्हें पुरानी बातों में खोया हुआ है जो कि उसके दिलों दिमाग पर बहुत गहरा असर छोड़कर गई थी एक वक्त लेकिन अभी बातों को याद नहीं करते हैं अतुल लड़के सर को हल्का सा हिलाया और चाय को कप उठाकर पीने लगा

 आज सुनीता ने इलायची लौंग डालकर बहुत अच्छी चाय बनाई थी चाय पीकर मन प्रसन्न हो गया अनीता आज कहीं बाहर घूम कर आते हैं अरे अभी तो आपकी तबीयत नहीं ठीक थी अभी तो आप आराम करने का कह रहे थे और आप घूमने के लिए कहां घूमने चाहेंगे मैं तो खाना भी बना कर रखा हुआ है इस रोटी से सीखनी है छोड़ो फिर किसी दिन चलेंगे

 सुनीता तुम कभी भी कहीं नहीं जाती हो कभी कब आए तो थोड़े पैसे हमारे भी खर्च कराया करो ना 

 सब आपके ही पैसे हैं मैं तो कुछ काम आती नहीं हूं घर में जो सुख सुविधा दे रखी है यह सब आपकी बदौलत ही तो है 

 सुनीता मैं तुमसे तो हर ही जाता हूं चलो तुम जीत जाओ तुम जब जीत जाती हो तो मुझे अच्छा लगता है लेकिन चलो आज कहीं मंदिर तक ही हो आते हैं

 ठीक है आप चाय पियो तब तक तुम्हें तैयार होकर आता हूं मंदिर चलते हैं बहुत दिनों से मैं कहीं भी 

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