मेरी ऑंखें
मासूमियत से भरी
मेरी आंखों में
है थोड़ी सी नाराजगी
या यूँ कहें छाई है उदासी
या फिर कोई शिकायत
जो करना चाहती है अपनों से ही
वह चाहती है जीतना खुद से ही
सपनों के आकाश को
जो नहीं है उसकी पहुंच में उसे भी
ताकि मुरझाई मुरझाई सी आंखों में
भर जाये थोड़ी ख़ुशी
जुगनू सी चमकती चमक..
क्यों छाई है इतनी बेबसी
मुश्किल तो नहीं है कुछ भी
क्यों थक कर चूर हो गई है अभी से
भटकना नहीं
तलाशना है
तराशना है और
पूरा कर लेना है हर ख्वाब अपना
हर यकीन को पा लेना है
प्रेम के क्षितिज पर
घरौंदा बनाकर
मुठ्ठी में भर लेना
अपना आसमां .....
सीमा असीम
14,10,24
प्यारी निधि आपके लिए ❤️
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