वो भी करता होगा यूँ 

मेरा इंतजार 

जिसके लिए मन मेरा 

है बेकरार...

वो भी करता होगा यूँ 

मेरा इंतजार 

जिसके लिए मन मेरा 

है बेकरार 

चाँदनी रातों में 

जब चाँद खिड़की से झाँकता होगा 

सुनहरी रौशनी में उसे भिगोता होगा 

तब वो लेता होगा मुझे पुकार 

बार बार 

हर बार...

वो भी करता होगा यूँ 

मेरा इंतजार 

जिसके लिए मन मेरा 

है बेकरार...

रात को थककर

 जब कभी वो सोता होगा 

सुबह उठकर 

आँखें भिगोता होगा 

कितनी बेचैनी से 

तपड़ता होगा 

घबराकर होता होगा बेजार 

बार बार 

हर बार 


वो भी करता होगा यूँ 

मेरा इंतजार 

जिसके लिए मन मेरा 

है बेकरार 

सीमा असीम 

13,10,24


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