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Showing posts from August, 2023

नादाँ मानव

  तुम्हें ईश्वर का डर नहीं न तुम वक्त से डरते हो कैसे हो सकते हो तुम इतना निडर तुम गलत हो तुमने गलतियां की हैं फिर भी तुम खुद हो सही कहते हो लानत हैं तुम पर डूब के मर जाओ अगर तुम इंसान हो...  छि घिन आती है मुझे तेरी सोच पर अरे नादाँ तू झाँक अपने गिरेवान में तुझे खुद पर घिन आ जायेगी...  अभी तेरा वक्त अच्छा है लेकिन याद रखना वक्त किसी को कभी माफ़ नहीं करता वो जरूर बदला लेगा तुझसे तेरे कर्मों का कभी खुश रहने नहीं देगा तुझे...  मूर्ख बनाकर सबको अपने को बुद्धिमान समझने की भूल करता है यही आदत एक दिन तुझे बर्बाद जरूर करेगी....  Seema Aseem
 अगर आप सही हो तो आपको कभी भय होगा ही नहीं लेकिन अगर आपके मन में चोर है अंदर कुछ और बाहर कुछ और तो याद रखना आपको अपने कर्मा लौटकर जरुर मिलेंगे वैसे कर्मा तो हमेशा ही मिलते हैं अच्छे को अच्छे और गलत को गलत  हैं न 
 सच में आपकी याद  हर पल साथ  कभी मुस्कुराती हुई याद  तो कभी उदास कर जाती हुई याद   आप जैसे भी हो  जो भी हो  जहाँ भी हो  हो तो मेरे ही  सिर्फ मेरे  तभी तो रहते हो साथ  बिना एक पल को दूर जाते हुए  हर दम साथ निभाते हुए  मेरे तुम और  मैं सिर्फ तेरी  सिर्फ तेरी ही ..... असीम 
  छोटी सी बालिका क्रांतिकारी मैना   सन 18 57 में जो पहला स्वतंत्रता संग्राम हुआ था उस में अनेकों बेटियाँ महिलाएं देश को आजाद करने में शहीद हुई थी उसमें महान क्रांतिकारी नाना साहब की 14 वर्षीय छोटी सी उम्र की बालिका कुमारी मैना की कहानी बहुत ही मार्मिक है जिसे पढ़कर मेरी आँखों से आँसू बहने लगे । कानपुर में होने वाली स्वतन्त्रता संग्राम की   क्रांति का नेतृत्व नाना साहब कर रहे थे । एक दिन कुछ क्रांतिकारी उनके सामने कुछ अकेली निःसहाय अंग्रेज़ स्त्रियों व बच्चों को पकड़ कर ला ये और कहा कि नाना साहब आप उन्हें दंड दे।  पर एक स च्चा भारतीय होने के नाते नाना ने कहा नहीं हम निहत्थे लोगों पर तक कभी वार नहीं करते फिर स्त्रियों और बच्चों को मार ने की यह तो कल्पना ही नहीं कर सकते । यह तो पाप की निशानी है । नाना साहब ने ऐसा कहते हुए उन स्त्रियों और बच्चों की जिम्मेदारी अपनी किशोरी बेटी मैना को सौंप दी और उन्हें किसी सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने का आदेश दे दिया । नाना साहब अन्य क्रांतिकारियों के साथ बिठूर चले गए और मैना शरणागत हो क र आए अंग्रेज़ स्त्रियॉं और बच्चों ...