जीवन में विद्या से बड़ा कोई धन नहीं है अर्पित या एक ऐसा धन है जिसे ना तू चोर चुरा सकते हैं और ना ही इसका कोई क्षरण हो सकता है यह तो एक बार अगर किसी को आ जाए तो इसका जन्मदिन निरंतर प्रगति होती है और विद्या एक एक लोक है ना विद्या विनयम ददाति विद्या मतलब ज्ञान आपको विनम्रता प्रदान करता है अगर आप विनम्र है तो आपको देखकर ही कोई समझ जाएगा कि यह बहुत बड़ा लिखा है सब इंसान है ठीक है ऐसा ही बाबा जितेंद्र पाल सिंह सोनी जी को देखकर लगता है कि वह कितने प्रबुद्ध ज्ञानी और समझदार इंसान है इतनी विनम्र इंसान तो बहुत जानते हैं शिक्षा का महत्व क्या होता है उन्होंने खुद भी इतनी अच्छी पढ़ाई की और ऐसी चीज से प्रेरित होकर कि विद्या को दान करना चाहिए और विद्या के लिए शिक्षा देने के लिए लोगों को प्रोत्साहित करना चाहिए इसी वजह से उन्होंने रोहतक शहर में दो स्कूल खोले हुए हैं एक स्कूल गुरुद्वारे के पास में ही जो कक्षा 8 तक है उसके बाद एक दूसरा जो है वह सीनियर इंटर कॉलेज है जिसमें सारे स्ट्रीम है कॉमर्स साइड आर्ट साइड मैथ्साइट बायोसाइट मतलब सारी स्ट्रीम है उसमें और इतनी टीचर से पब्लिक स्कूल है बंदा बहादुर पब्लिक स्कूल के नाम से जो एक बहुत बड़े खुले प्रांगण में बना हुआ है और चारों तरफ प्रकृति का वातावरण है जहां पर बच्चे बहुत अच्छे से शिक्षा ग्रहण करते हैं लड़के लड़कियां साथ में पढ़ते हैं क्योंकि को एजुकेशन है उन्होंने शिक्षा देने के लिए बच्चों को शिक्षित करने के लिए एक एक प्रयास किया जो बहुत सफल हुआ और आज की स्कूल में इतने सारे बच्चे हैं जो बहुत अच्छे से पढ़ाई कर रहे हैं और आगे निकल रहे हैं जाने कितने बच्चे तो वहां पर लिख कर आगे कुछ बन गए हैं संस्कार और से भरे हुए बच्चे जब कभी भी आप स्कूल में जो हो तो देख कर ही पता चल जाता है कि कितने बच्चे संस् बच्चे बच्चे कितने संस्कारी हैं और उनमें संस्कार कितने ज्यादा है वहां की टीचर और उनको जाता है क्रिएट उसके साथ साथ ही मैनेजमेंट को और बाबा जी को भी जाता है अगर बाबा जी यह कदम नहीं उठाती बच्चों को शिक्षा देने का तो शायद वह एक चीज से बचत राजा थे कि वहां के बच्चे इतने संस्कारी और इतने अच्छे पढ़कर निकले सारा श्रेय जाता है 19 लोगों को ऐसे ही एक स्कूल डेरा बंदा बहादुर में है जहां पर चारों तरफ गांव का है और गांव में हर जाति के लोग रहते हैं और वहां छोटे-छोटे बच्चे हैं जिनको पढ़ाई करने के लिए कोई शिक्षा निकाय कोई स्कूल आसपास नहीं है तो वह गुरुद्वारे में एक स्कूल खोला हुआ है जो प्राइमरी स्कूल है और अधिकतर बच्चे वहां पर पढ़ने के लिए आते हैं जो बच्चे सक्षम है बाहर जाने के लिए तो वह वहां बाहर जाते हैं पढ़ने के लिए रस्सी वगैरह लेकर या सिया और कोई आसपास के शहर कटरा और जो सक्षम नहीं है वह सारे बच्चे स्कूल में आते हैं और अच्छे से पढ़ाई होती है टीचर है आज रियासी से भी कुछ टीचर्स वहां पर आती है बच्चों को पढ़ाती हैं और उनमें अच्छे संस्कार देती है अरे सब संभव किया है बाबा जी ने अपने अथक प्रयासों से उनका एक प्रयास नहीं है उन्होंने अनेक प्रयास किए शिक्षा के क्षेत्र में समाज के क्षेत्र में हर क्षेत्र में दीन दुखियों की सेवा करना और भी बहुत सारी चीजें लेकिन शिक्षा का महत्व को सबसे ज्यादा है अगर हमारा देश शिक्षित होता है तो वह सबसे ज्यादा प्रगति करता है उन्नति करता है भले ही हमारे देश में नौकरियां उतनी नहीं हो तो उसके लिए बाहर जाकर शिक्षित अगर एक इंसान शिक्षित है किसी देश का तो वह दूसरे देश में जाकर भी धन कमा कर वापस ला सकता है अपने देश को समृद्ध कर सकता है तो सबसे ज्यादा मायने रखता है मैं एवं बच्चों को शिक्षित करना उनको अच्छे से पढ़ाई कराना उनको अच्छी शिक्षा देना तो सबसे पहले बच्चे की हमारा जो भविष्य होते हैं वह बच्चे ही होते हैं तो उन्हें शिक्षित करना करने का बीड़ा उठाया बाबा जितेंद्र पाल सिंह सोनी ने इसमें वह पूरी तरह से सफल हुए क्योंकि स्कूल बहुत अच्छे से चल रहे हैं बहुत अच्छे बच्चे हैं आज सारी टीचर्स है डिसिप्लिन है स्कूल में मैनेजमेंट और पर वातावरण सब कुछ मिलाकर बहुत ही अच्छा है जो अच्छे अच्छे स्कूलों से टक्कर लेता है जो हाथ नामी-गिरामी स्कूल है उनमें बाबा बंदा बहादुर पब्लिक स्कूल का नाम बहुत अच्छा है बाबा जी ने अपना एक प्रयास किया और बच्चों को शिक्षा दिलाकर उन्हें अच्छे इंसान बनाने की एक कोशिश की जो उनके उनके व्यक्तित्व को दर्शाती है कि वह समझते हैं कि शिक्षा का क्या महत्व होता है और हमारा भविष्य अगर शिक्षित है तो कितनी तरक्की करेगा विनम्रता और सभ्यता से भरा हुआ व्यक्ति अगर कहीं पर भी जाता है तो वह अपनी छाप छोड़ ही देता है
मुस्कुराना
कितना अच्छा लगता है सुबह सुबह सूरज का निकलना पंछियों का चहकना फूलों का खिलना और रोशनी का बिखर जाना रात के अंधेरे को मिटाते हुए जब रोशनी होती है तो मन खुशी से प्रफुल्लित होता है बहुत अच्छा लगता है मुझे दुनिया को रोशनी में देखना मुझे नहीं पसंद अंधेरा नहीं पसंद मुझे मुरझाना नहीं पसंद मुझे रोशनी का कम हो जाना लेकिन सुनो इस सब से भी ज्यादा अच्छा लगता है मुझे तुम्हारा मुस्कुराना तुम्हारा मुझ से बतियाना....... सीमा असीम 3, 10, 20
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