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Showing posts from March, 2022
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तन के बंधन तो तोड़े जा सकते हैं पर मन के बंधन कोई कैसे तोड़ सकता है भला जो रिश्ते आत्मा से जुड़ जाते है उन पर जन्म या मृत्यु का कोई प्रभाव कहां पड़ता है जोड़े है हमने आपस में आत्मा से आत्मा के तार एक तार खींचता है तो दूसरे को महसूस होता है दूसरा अगर जोर से खींचता है तो पहला दर्द से भर जाता है आत्मा का बंधन है हां सच्ची आत्मा का सच्चा बंधन.. असीम
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अच्छा लगता है मुझे तुम्हारा खुश रहना तुम्हारा मुस्कुराना और बेपरवाह होकर खिल खिलाना तुम तो जानते हो ना तुम्हारी खुशी के लिए कितनी दुआएं मन्नतें और सजदे किए न हो तुम्हें कभी कोई तकलीफ दुःख या दर्द इ सके लिए हमेशा परवाह की तुम समझो ना समझो मैंने तो सच्चे मन से निस्वार्थ भावना से किया जो मुझे सही लगा वही सब किया प्रार्थना में सिर्फ तुम्हारा नाम शामिल किया कुछ भी कभी कोई गलत किया ही नहीं अगर तुम गलत समझ बैठे तो क्या फर्क नहीं पड़ता मेरा मन जानता है सच्चाई और वो रब जो ऊपर बैठा सब देख रहा है वह भी सब जानता है मैं हमेशा निर्दोष हूं थी और रहूंगी भी कभी बिना दोष के भी सजा मिल जाती है सजा देने वाला क्या निर्दोष है जो बिना किसी दोष के भी सजा देता है उसे किसी भी पल चैन नहीं पड़ता इसलिए तुम खुश रहो बाकी उस रब पर छोड़ दो जो होगा अच्छा ही होगा क्योंकि जो भी होता है अच्छे के लिए ही होता है हमारे भले के लिए ही होता है... सीमा असीम...
करीब
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तुम्हारे दुख में मैं दुखी हो जाती हूं और तुम्हारे सुख में सुखी होती हूं चाहे तुम दूर रहो या पास रहो मैं होती हूं हमेशा तुम्हारे ही साथ किसी ना किसी बहाने से यादों में बसा कर मैं तुम्हारे करीब हो जाती हूं पुरानी यादों को सीने से लगाकर बहुत पास आ जाती हूं दूर होकर भी कहां दूर रहती हूं मैं सिर्फ तुम्हारे पास होती हूं जैसे फूलों से खुशबू कभी दूर नहीं होती इंद्रधनुष से रंग वैसे ही मैं तुमसे अलग होकर भी अलग कैसे हो सकती हूं क्योंकि अगर मैं फूल हूं तो तुम खुशबू हो अगर तुम धनुष हो तो मैं रंग बस हम आपस में इसी तरह से गुथे हुए हैं फूल रंग और खुशबू की तरह तो दूर रहकर भी करीब और करीब रहकर भी करीब ही होते हैं... सीमा असीम
एक से हैं हम
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खुश होने में और खुश दिखाने में बहुत अंतर होता है तुम दुःख देकर सुखी हो अगर तो मैं बिल्कुल सहमत नहीं हूँ तुम दिल ही दिल में रोते होंगे जब दिल मेरा दुखाते होंगे खुश होने के लिए जरूरी है खुशियाँ बाँटना जो लेने से ज्यादा देने में विश्वास करते हैं वे हमेशा खुश और सुखी रहते हैं अगर किसी राजा के राज में सारी जनता बहुत खुश है और सिर्फ एक व्यक्ति भी दुखी है तो वह राजा कभी सुखी और खुश नहीं रह सकता वैसे ही तुम सबको खुशी दे कर सुख दे कर भी कभी खुश नहीं हो सकते जब तक मैं खुश नहीं हूं मेरा मन सुखी नहीं है तुम कैसे हो सकते हो खुश या सुखी क्योंकि हम से तुम हो और तुमसे हम अलग नहीं है हम एक हैं और एक से है हम... सीमा असीम असीम