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तुम्हारी हंसी ------------------------- न जाने कितना छुपा होता है दर्द  हमारी हंसी में  हमारी मुस्कान में  जहां मर्म है  संवेदना है  वहां हंसी भी है।  हम हंसते हैं  मुस्कुराते हैं  तो चमकने लगता है हमारा चेहरा  जैसे धुला-धुला सा  बिल्कुल साफ  और पवित्र। ऐसी ही है  तुम्हारी हंसी भी  तुम जब हंसती हो  खिल जाता है जैसे  तुम्हारा पोर-पोर  तुम्हारे चेहरे की खाल को  पतला कर देती है  तुम्हारी हंसी  तुम्हारी मुस्कुराहट।  जब हंसती हो तुम  परिंदे जैसे उड़ने लगते हैं  आसमान में खुशी से।  तुम्हारी धिमि हंसी  तुम्हारी धिमि मुस्कुराहट  लगती है बिलकुल नरम, मुलायम  जैसे डूबी हो  ओस की नमी में। आंखें गीली-सी हो जाती हैं खुशी से  जब तुम हंसती हो खिलखिलाकर  बिल्कुल पागलों-सी  तब हंसी जैसे थिरकती रहती  पल भर वहीं पर  तुम्हारे आसपास।  कभी तुम्हारी हंसी  तुम्हारी मुस्कुराहट  स्वतः स्फूर्त होती  जैसे निःसृत हो रही हो  तुम्हारे भ...
 कभी सोचती हूं तो लगता है कि काम क्रोध लोभ मोह यह सब हमारे मन के विकार है ना जाने क्यों लोग इन्हें ही तवज्जो देना शुरू कर देते हैं इस दुनिया में क्या है कुछ भी नहीं सब क्षणभंगुर है इतने राजा महाराजा हुए सब खत्म हो गया कुछ भी नहीं बचा हम आज है हम कल नहीं रहेंगे फिर किसलिए इतना दम

याद

 जब जब याद आती है तुम्हारी  बेवजह बेपनाह बेइंतहा चली आती है वो पल वो दिन वो संगसाथ सब अपने संग लिए चली आती है चेहरे पर उदासीआँखों में आँसू दिल में दर्द छोड़ जाती है सुनो बताओ मुझे तुम क्यों इसकदर बेपरवाह तुम्हारी याद मुझे आती है... असीम 
 मैं तुम पर बहुत ज्यादा विश्वास करती हूं हद से ज्यादा कोई एक बात भी अपने मन में नहीं रखती सारी बातें मैं तुमसे कह देती हूं दिल में कुछ रहता ही नहीं है मेरे तुम्हारे सिवा कुछ यहां तक कि जो भी बात मुझसे कोई कुछ कहता है वह भी मैं तुम्हें बता देती हूं मैं कभी कुछ तुमसे छुपाना ही नहीं चाहती मैं बार-बार तुम्हें जताना चाहती हूं लेकिन जब तुम मेरे विश्वास को ठेस पहुंचाते हो उसे झूठ बोलते हो कोई भी एक बात वह चीज मुझे रुलाती रहती है बरसो बरसो दिन रात सुबह दोपहर जब भी वह चीज भी रहती है दिल में और वह मुझे रुलाती है कि तुमने मुझसे झूठ बोला..मुझे सच भी तो कह सकते थे  हर बार वही झूठ को अधूरा ना बार-बार उसे झूठ को कहना इतनी सफाई के साथ कहना मैंने तो तुमसे कभी कोई सफाई नहीं मांगी तुम अगर मुझे कोई बात बता भी रहे हो तो सच बताओ झूठ बताने का क्या मतलब बनता है उसे छुपाने का क्या मतलब बताएं मैं तो तुमसे पैसे भी हमेशा ही तुम्हारी हूं तुम्हें प्रेम करती हूं हद से ज्यादा करती हूं कोई नहीं कर सकता इतना तुम्हें प्रेम  पवित्र और सच्चा प्रेम उसमें नाम मात्र को भी कोई मिलावट नहीं है प्रेम में इतना पारदर...
घर पर बात हो जाने से मन में संतुष्टि का भाव आ गया था ना अभी तो बहुत फिक्र लगी हुई थी कि घर पर सब परेशान हो रहे होंगे खैर अब बात हो गई तो अब जाकर आराम से हम सो सकते हैं क्योंकि सोनू अगर नहीं सोएंगे तो अगले दिन उठ नहीं पाएंगे और हमारी थकान कम नहीं होगी  बिस्तर पर लेटते ही नींद में आकर बसेरा डाल दिया और हम गहरी नींद में सो गए आंख सुबह 6:00 बजे के करीब खुली तो देखा पहाड़ों से दूर छन छन के हमारी टेंट के अंदर आ रही है मैंने उसके बाहर निकल आई जब मैं इतनी दूर आई हूं तो इस प्रेशियस को क्यों ना महसूस किया जाए और यहां के वातावरण को क्यों ना महसूस किया जाए आंखों क्यों ना जिया जाए केवल हम देखने के लिए सोने के लिए आराम उठाने के लिए तो नहीं आए थे ना  सूर्य देव भगवान पहाड़ों पर आराम से उतरते जा रहे थे मानव पहाड़ ऊपर अधूरे नीचे आ गया हो नदी की कलकल की आवाज कानों में आ रही थी सामने ही तो नदी है कितनी सीट मिली थी टेंट और सड़क के उस पार नदी बीच में नदी ही थी थोड़ा सा नीचे उतर कर जाओ तो सड़क को पार करके जा और नदी सामने दिख रही थी अभी तो खैर नहीं नदी हम थोड़ी देर बाद जाएंगे थोड़ा धूप निकल आए और अच्...