वक्त
तू खुश है कि
तेरी मनमानियाँ
तेरी मन्मर्जियाँ जारी हैं
तू खुश है कि
जो चाहें किया
जैसे चाहें जिया
तू खुश है कि
तेरे लिए सब खेल है
पल भर का मेल है
तू खुश है कि
तुझे कोई दर्द नहीं
कोई मन में गिला नहीं
तू खुश है कि
जिसे मन किया आने दिया
जिसे मन चाहें दगा दिया
खुश होगा इश्वर भी एक दिन
यूँ ही कभी
जब खोलेगा तेरे काले चिट्ठे
जब करेगा खड़ा कटघरे में
कि वक्त को आने में
वक्त लगता जरुर है
पर सही वक्त आता भी जरुर है !!!
सीमा असीम
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