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Showing posts from September, 2022
 अपनी तारीफ़ खुद ही करते हो गलत को भी सच साबित करते हो कितने स्वार्थी हो तुम अब समझी हूं एक चेहरे पर कई चेहरे लगाया करते हो उफ्फ ऐसे हो तुम क्यों नहीं जाना पहले शर्म न लिहाज जरा भी तुम्हें क्या झूठ को सच क्यों बनाते फिरते हो काश कि आए थोड़ी तो लिहाज तुम्हें अपनी गलतियों का अहसास हो तुम्हें।।
 मुझे लगता है कि जो भी होता है अच्छे के लिए ही होता है क्योंकि ईश्वर ही सब करते हैं,अतः किसी भी काम को अपने हिसाब से न होने पर हमें हताश या निराश नहीं होना चाहिए।। बस अपने मन में हमें हमेशा यह भाव रखना चाहिए,जो भी होगा सब बढ़िया ही होगा।। असीम २४,९,२२
 तेरा पेट वाकई बहुत बड़ा है  कभी भरता ही नहीं है    खूब लुटा जी भरकर  तन मन और धन से  फिर हाथ पाँव काट कर  दूर फेंक देता है  कि तुझे कभी छू तक न न पाए  बड़ा बेशर्म शख्स है  किसी भी बात का कोई असर नहीं है  हो भी कैसे  आखिर तेरे संस्कार ही यही हैं न  बर्बाद करना और खुद ख़ुशी मनाना  लेकिन याद रखना उसकी लाठी बेआवाज होती है  जो ऊपर बैठा सब देख  है  याद रखना उसके दरवार में देर जरुर है  पर अंधेर बिलकुल भी नहीं  तू भी रोयेगा  और तेरे आंसूं पोछने वाला कोई नहीं होगा  खून के आंसू रोयेगा तू  जैसे तूने आँखों में भरे हैं हमारे  किसी को दगा देने का मतलब  एक दिन जरुर समझ आ जायेगा  तुझे  जब तू तडपेगा गिद्गिदायेगा  पर ढाढ़स बढाने वाला दूर दूर तक कोई नहीं होगा  तब शायद हमारी रूह को तसल्ली मिलेगी  और तुझे भी अहसास होगा किसी को यूँ  दगा देकर धोखा देकर बर्बाद कर देना  क्या अंजाम होता है ..... असीम 
कहाँ जाओगे तुम दूर मुझसे कभी   जब नस नस में हो तुम ही बसे  याद करने की जरूरत नहीं मुझे  भुलाए नहीं जा सके हो कभी  अश्कों में दिखता है अक्स तेरा  नहीं गिरने देती गालों से नीचे कभी  पल पल में नाम तेरा जुबान पर  पुकारने लगता है जब चाहें कभी  नहीं जरुरत अब तन की मुझे  समाये हो तुम ऐसे मुझमें कहीं...... सीमा असीम  
 छल कपट प्रपंच से अगर किसी को अपना बना लिया तो क्या फायदा  बनाना है अगर किसी को अपना तो उसका दिल जीत  कर दिखाओ  माना कि हो तुम बहुत धुँर्न्धर किसी का भी दिल और मन  तोड़ देने में  कभी तो बहते हुए मेरे आंसुओं को जरा तुम पोंछ कर तो दिखाओ   तब नजर आयेगी तुम्हारे  इंसान होने की  इंसानियत जरा सी ही सही  आकर अपने  किये वादे और अपना फर्ज निभा कर तो दिखाओ   असीम 
 सच्चे दिल की सच्ची हूं रहुंगी भी सदा तू हैं गलत तो रहेगा गलत ही रहेगा न  असीम 
तेरी खुशी को रात दिन दुआएं की मैंने तूने ही रुला दिया मुझे जी भरकर बेशर्म असीम