वक़्त

 मुझे बस इतना पता है

 वक्त आता है सभी का एक दिन

 हां जब मेरा वक्त आएगा

 तो क्या मैं उन लोगों को सजा दे पाऊंगी

 जिन लोगों ने मुझे बहुत सताया

 रुलाया तड़पाया तरसाया 

 जिस्म से जान खींच ली हो इस तरह से 

 नस नस का सारा लहू निचोड़ लिया हो

 मेरी सच्चाई के गवाह है मेरे बहते हुए आंसू

 दिल में बेपनाह उठता  हुआ दर्द

 जो किसी हाल किसी तरह नहीं समझता

 बस बार-बार यही दुहाई देता है

 ऐसा किसी के साथ ना हो

मेरे दुश्मन के साथ भी ना  हो

 जो किया तुमने

 शर्म आती नहीं होगी ना तुम्हें जरा भी

 काश होता तेरी आंखों में भी पानी

 तो इस तरह कभी नहीं करता

 समझता दर्द की कीमत

 किसी को यूँ बर्बाद ना करता

चल खुश ऱह तू

और इंतजार कर वक़्त के बदलने का

कि वक़्त नहीं रहता सदा एक जैसा....

काश पहले समझती मंशा तुम्हारी

फिर यूँ अपनी जाँ न गवाई होती
सिर्फ निभाना ही तो थी मंशा मेरी
तुम्हें यह बात समझ आयी होती

असीम 

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