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Showing posts from March, 2024

मूरख

तुम क्या जानों प्रेम  अगर जानते तो कभी भी  मुझे मूरख न कहते  तुम अपनी बुद्धिमत्ता से आंकते रहे मुझे  और मैं बनी रही मूरख  लेकिन यकीं जानों  मैंने प्रेम के उस चरम को पाया है  जो तुम कभी महसूस ही नहीं कर सकते  अब न बची कोई चाह  न कोई इच्छा  न कोई अभिलाषा  कि मैंने जिया है सच्चे प्रेम को  तुम्हें पाकर ........... सीमा असीम  ३०.३,२४ 

तुम

 अच्छी लगती हैं  तुम्हारी यादे  तुम्हारी बाते  और तुम भी ......

करमा

यह दुनिया एक मेला है  यहाँ हम सब इन्सान  आते हैं और  मेले की रंगीनियों में भटक जाते हैं  कुछ याद ही नहीं रहता है कि  हम इस दुनिया में क्यों आये हैं  हम भूल जाते हैं हमारे द्वारा किये गए कर्म  हमारा आगे का रास्ता प्रसस्त करेंगे  सबके संग मिलकर खुशियाँ मनाते हैं  फिर एक वक्त ऐसा आता है  जब हम बिलकुल अकेले होते हैं  कोई हमारा साथ निभाने वाला नहीं होता  इसलिए मत भटको मेले में  रखो याद अपने कर्मों को  और बना लो सफल अपने जीवन को  ताकि जिस लिए हम यहाँ आये हैं  वो कार्य अच्छे से  हो जाए........ सीमा असीम  २९,३,२४      

याद करते हो

आजकल न जाने क्यों  लग रहा है ऐसा  कि तुम मुझे याद कर रहे हो  मेरे ख्वाबों में आ जाते हो  कभी मेरी यादों में  आते हो चुपके से और  मेरे होंठो पर   मुस्कराहट बनकर बिखर जाते हो  न जाने क्यों आजकल  हर आती और जाती हुई स्वांस के साथ  तुम चले आते हो  सुनो जरा मुझे सच सच बताओ  क्या तुम मुझे याद कर रहे हो  जो यूँ मेरी स्वांसों में महक रहे हो  मेरी नम आँखों में छलक रहे हो  और मेरे कभी मेरे यूँ होठों पर बिखर रहे हो ........ सीमा असम  २८,३,२४