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Showing posts from April, 2023

वक्त

तू खुश है कि तेरी मनमानियाँ तेरी मन्मर्जियाँ जारी हैं तू खुश है कि जो चाहें किया जैसे चाहें जिया तू खुश है कि तेरे लिए सब खेल है पल भर का मेल है तू खुश है कि तुझे कोई दर्द नहीं कोई मन में गिला नहीं तू खुश है कि जिसे मन किया आने दिया जिसे मन चाहें दगा दिया खुश होगा इश्वर भी एक दिन यूँ ही कभी जब खोलेगा तेरे काले चिट्ठे जब करेगा खड़ा कटघरे में कि वक्त को आने में वक्त लगता जरुर है पर सही वक्त आता भी जरुर है !!! सीमा असीम

ख़ामोशी

खामोश हो गयी हूँ मैं बहुत ज्यादा इतनी ज्यादा कि दिल अब कुछ कहना नहीं चाहता है office.nbt@nic.in न कुछ सुनना चाहता है न खुद से न किसी और से बस आंख भर आती है और आत्मा चीत्कार कर उठती है आत्मा से निकली हुई यह चीत्कार सात आसमान चीर देती है ] तुम क्या चीज हो सिर्फ अदने से एक इन्सान ही तो जो आत्मा विहीन एक जिस्म भर है जिसे चाहिए होती हैं जिस्मानी खुशियाँ मात्र जिस्म की भूख मिटने तक की चाहत होती है तुम्हारी एक दुसरे जिस्म से वो भला आत्मिक प्रेम को कहाँ समझेगा कहाँ होगी उसकी नजरों में कोई अहमियत किसी के सच्चे प्रेम की बस इसलिए ही खामोश रहने को जी चाहता है न तुमसे कुछ कहना है अब न किसी और से मौन को धारण कर लिया और मुस्कान को सजा लिया है चेहरे पर अपने लबों पर ...... सीमा असीम