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याद

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  यूं ही तो नहीं आती है मुझे उसकी याद  वह भी तो हमें यूं ही याद किया करता होगा  कहां भूल पाता होगा पल भर को भी मुझे  हर आती जाती सांस से मेरा नाम लिया करता होगा  भेजता होगा पैगाम ए मोहब्बत  कभी हवाओं से कह कर  कभी घटाओ से कह कर  कभी फिजाओं से कहकर  अकेले में घंटों बैठकर गुजार दिया करता होगा दूर तक बिखरी हुई वादियों में बैठकर  जोर से मेरे नाम की आवाज लगाया करता होगा  कभी नदी के किनारे बैठ कर देखता होगा जो अपनी परछाईं   तो मेरी अक्स पा लेता होगा  अंजलि से पकड़ने की कोशिश करता होगा अगर  तो पर उसके हाथ में कुछ भी नहीं आता होगा  अश्कों से भिगो लेता होगा अपना चेहरा  अपनी आत्मा को भी धोकर पवित्र कर लेता होगा  बस यूं ही दिन रात वो भी मुझे याद किया करता होगा  हर आती जाती सांस से मेरा नाम लिया करता होगा.. सीमा असीम .  असीम 
  करीब 1 घंटा हो गया था लेकिन अभी तक सुमित का कहीं अता-पता नहीं था कहां चली गई थी देर हो गई अभी तक वापस क्यों नहीं आए मन बहुत घबरा रहा था ऊपर से भी वही पढ़ रही थी मानो वह चढ़ती चली आ रही थी मैं तो कितने किनारे से खड़ी हुई थी फिर भी एक शो का सहारा था और आप तो चला जा रहा था लग रहा था सब को बड़ी जल्दी हो रही है और ऐसा लग रहा था कि सारे ही लोग निकल कर सबको अपने इस मेले में चले आए हैं मेरे पास गाड़ी की चाबी थी और मैं वहीं पर बैठी हुई थी लेकिन मुझे इतनी हिम्मत नहीं हो रही थी कि इस भीड़ में से गाड़ी को निकाल कर बाहर चले जाओ और वहां पर कट अकेला गाड़ी को खड़े छोड़कर जाना भी सुरक्षित नहीं था कि पुलिस वाले बहुत सारी वहीं पर खड़े हुए थे लेकिन बेबी कितना कंट्रोल करते हैं क्योंकि बैंक का एक रेला था इस मेले में मैंने तो शायद अपनी जिंदगी में इतनी भी पहली बार देखी थी इतने लोगों का हजूर जैसे भी सब एक-दूसरे को पीछे छोड़कर आगे बढ़ जाना चाहते थे शायद वह सबसे पहले जाकर उस मेले में खरीददारी कर लेना चाहते थे दुकानों पर खड़े होकर सब चीजें देख लेना चाहते थे ना जाने उनके मन में कैसे जिज्ञासा थी मेला देखने आए...
 बहुत दुःख होता है  जब कोई भरोसा तोड़ता है  जीने का मन नहीं करता  इतने बुरे लोग क्यों बनाये तूने ईशर