कारोबार
कहाँ होती होंगी उसे तकलीफ या दर्द होता होगा जिनका धंधा है यही जिनका कारोबार है यही.. उसे क्या फर्क पड़ता होगा मेरी जाँ निकलने से उसने तो सब सोचसमझ कर किया होगा बहुत चतुर दिमाग़ है उस एहसान फरामोश के पास दिल का उसके जिस्म में कहीं नामोनिशान नहीं होगा स्वार्थ से भरा हुआ सिर्फ फायदा ही देखता रहा अपना मतलब निकलते ही पहचानना भूल गया होगा मत रो अब सीमाउसको याद करके रातदिन