तुम्हारी हंसी ------------------------- न जाने कितना छुपा होता है दर्द हमारी हंसी में हमारी मुस्कान में जहां मर्म है संवेदना है वहां हंसी भी है। हम हंसते हैं मुस्कुराते हैं तो चमकने लगता है हमारा चेहरा जैसे धुला-धुला सा बिल्कुल साफ और पवित्र। ऐसी ही है तुम्हारी हंसी भी तुम जब हंसती हो खिल जाता है जैसे तुम्हारा पोर-पोर तुम्हारे चेहरे की खाल को पतला कर देती है तुम्हारी हंसी तुम्हारी मुस्कुराहट। जब हंसती हो तुम परिंदे जैसे उड़ने लगते हैं आसमान में खुशी से। तुम्हारी धिमि हंसी तुम्हारी धिमि मुस्कुराहट लगती है बिलकुल नरम, मुलायम जैसे डूबी हो ओस की नमी में। आंखें गीली-सी हो जाती हैं खुशी से जब तुम हंसती हो खिलखिलाकर बिल्कुल पागलों-सी तब हंसी जैसे थिरकती रहती पल भर वहीं पर तुम्हारे आसपास। कभी तुम्हारी हंसी तुम्हारी मुस्कुराहट स्वतः स्फूर्त होती जैसे निःसृत हो रही हो तुम्हारे भ...
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