Posts

Showing posts from September, 2021
तुम्हारी हंसी ------------------------- न जाने कितना छुपा होता है दर्द  हमारी हंसी में  हमारी मुस्कान में  जहां मर्म है  संवेदना है  वहां हंसी भी है।  हम हंसते हैं  मुस्कुराते हैं  तो चमकने लगता है हमारा चेहरा  जैसे धुला-धुला सा  बिल्कुल साफ  और पवित्र। ऐसी ही है  तुम्हारी हंसी भी  तुम जब हंसती हो  खिल जाता है जैसे  तुम्हारा पोर-पोर  तुम्हारे चेहरे की खाल को  पतला कर देती है  तुम्हारी हंसी  तुम्हारी मुस्कुराहट।  जब हंसती हो तुम  परिंदे जैसे उड़ने लगते हैं  आसमान में खुशी से।  तुम्हारी धिमि हंसी  तुम्हारी धिमि मुस्कुराहट  लगती है बिलकुल नरम, मुलायम  जैसे डूबी हो  ओस की नमी में। आंखें गीली-सी हो जाती हैं खुशी से  जब तुम हंसती हो खिलखिलाकर  बिल्कुल पागलों-सी  तब हंसी जैसे थिरकती रहती  पल भर वहीं पर  तुम्हारे आसपास।  कभी तुम्हारी हंसी  तुम्हारी मुस्कुराहट  स्वतः स्फूर्त होती  जैसे निःसृत हो रही हो  तुम्हारे भ...
 कभी सोचती हूं तो लगता है कि काम क्रोध लोभ मोह यह सब हमारे मन के विकार है ना जाने क्यों लोग इन्हें ही तवज्जो देना शुरू कर देते हैं इस दुनिया में क्या है कुछ भी नहीं सब क्षणभंगुर है इतने राजा महाराजा हुए सब खत्म हो गया कुछ भी नहीं बचा हम आज है हम कल नहीं रहेंगे फिर किसलिए इतना दम

याद

 जब जब याद आती है तुम्हारी  बेवजह बेपनाह बेइंतहा चली आती है वो पल वो दिन वो संगसाथ सब अपने संग लिए चली आती है चेहरे पर उदासीआँखों में आँसू दिल में दर्द छोड़ जाती है सुनो बताओ मुझे तुम क्यों इसकदर बेपरवाह तुम्हारी याद मुझे आती है... असीम