कहानी

दर्द इतना ज्यादा आंखों के आंसू रो कि नहीं रहे जितना रोकने की कोशिश करो उतना ही ज्यादा प्यार है मनु है ऐसा लगता जैसे कि कोई कलेजा खींच के लिए चला जा रहा है मैं आपको कितनी चोट पर चाहिए सीने पर जोर जोर से मारा सर के बाल पूरी तरह से खींच ली है परेशान क्यों कर के अपना गला दबा दें करके कोशिश की जवानी के लेकिन सुबह जा रहे थे जा रहे हो आज का नहीं है कई सालों से लगाता है चलना है क्यों जैसे सच्चे दिल से अपना समझती वही उसे दगाबाजी कर रहा था झूठ बोलनालना सफाई देना उसका शक्ल बन गया था की नजरों में किसी औरत की कोई इज्जत ही नहीं जिसको भी तो उससे उससे ही बात करता हूं अपने शब्दों से उसका हंगामा कर देता हैरत होती थी ठीक है सा कैसे होता है कोई आदमी जो दिल से हमको छोड़ना तन मन धन से बर्बाद करके औरत का मस्त गाना मस्त ईमान धिक्कार है धिक्कार है लानत इसे कहते हैं न जाने क्यों कोई फर्क नहीं पड़ता उस शख्स को कोई भी फर्क नहीं पड़ता पहले से ज्यादा और बहरा हो गया

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