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Showing posts from May, 2018
तुम ही हो जिंदगी अब तुम ही हो !! न जाने क्यों ऐसा लगता है कि जैसे तुम मेरे हो सिर्फ मेरे और मैं तुम्हारे चेहरे को गौर से देखती रहती हूँ पल भर को भी पलक झपकाने का दिल नहीं करता है लेकिन प्रिय फिर ऐसा क्यों महसूस होता है कि मैं अकेले ही तुम्हें निभा रही हूँ मैं ही सिर्फ वफा किए जा रही हूँ और तुम्हें तनिक भी फिक्र नहीं होती ? हो सकता है यह मेरा भ्रम हो लेकिन यह भ्रम भी क्यों है ? किसलिए आखिर ? लाख कोशिश के बाद भी मैं नहीं समझ पाती हूँ ! बस मैं इतना जानती हूँ कि जब मैं एकनिष्ठ भावना के साथ तुम्हें प्रेम करती हूँ तो तुम भी तो मेरी ही तरह मुझे प्रेम करते हो न ? प्रिय तुम जानते हो न, समझते हो न कि प्रेम करना तो बहुत आसान है लेकिन इसे निभाना बहुत ही मुश्किल है बहुत ही कठिन है शायद यह बजह हो कि तुम मुश्किलों से घबरा जाते हो  ! मैं तो बस यूं ही सदा तुम्हें प्रेम करती रहूँगी और वफा को निभाती रहूँगी अपने सच्चे मन से ! बहुत ही कठिन डगर है पनघट की लेकिन चलना है मुझे इसी तरह ध्यानमगन होकर ! खुद को बिसराकर ! सिर्फ तुममें ही लीन होकर ! मैं मैं न रही मैं तुम बन गयी और तुम्हारे सारे दुख मेरे ...
आप के प्यार में हम सवरने लगे देख के आप को हम निखरने लगे इस कदर आप से हम को मोहब्बत हुई इस कदर आप से हम को मोहब्बत हुई टूट के बाजुओं में बिखरने लगे आप जो इस तरह से तड़पाएँगे ऐसे आलम में पागल हो जाएँगे वो मिल गया जिसकी कब से तलाश थी बेचैन सी इन सासों में जन्मो की प्यास थी जिस्म से रूह में हम उतरने लगे आप के प्यार में हम सवारने लगे !!
साँसों की डोर  महक उठती है अमृत की रसधर बह उठती है कीचड़ में जैसे कमल खिला हो जब होता है प्रिय साथ तुम्हारा !! \सुनो प्रिय               जो मैं तुम्हें लिखती हूँ न, तो सनम मैं सिर्फ लिखती भर नहीं हूँ बल्कि मैं जीती हूँ तुम्हें ! पल पल हर पल में ! क्या तुम्हें भी यही अहसास होता है जो मैं महसूस करती  हूँ ? क्या तुम भी मुझे यूं ही जीते हो जैसे मैं तुम्हें जीती हूँ ? लेकिन प्रिय मुझे इन सब बातों  से तनिक, रत्ती भर मात्र भी फर्क नहीं पड़ता क्योंकि मैं खुद पर बिशवास करती हूँ मैं जानती हूँ कि मैं प्रेम में हूँ सिर्फ तुम्हारे प्रेम में .....सिर्फ तुम्हें जीते हुए ही अपने दिन रात गुजरती हूँ मेरे प्रिय तुम समझते हो बस इतना ही काफी है  कि मेरो चाहत को दरकार यही है और कुछ भी नहीं ! तुम मेरे हो या नहीं इससे भी कोई फर्क नहीं पड़ता !  मैं हार चुकी  हूँ अपना सब कुछ  तुम्हारे प्रेम में ....... हर चोट से मैंने खुद को मजबूत किया है हर ज़ख़म को दिल पर महसूस किया है निभाई है हरहाल अपने हिस्से की सच्चाई मैंने सनम प्रेम सिर्फ त...