न कोई है न कोई था 
जिंदगी में तुम्हारे सिवा 
तुम देना साथ मेरा 
ओ हमनवाज
ओ मेरे हमनवाज
सुनो प्रिय 
           मैं तुम्हारी हूँ और सिर्फ तुम्हारी ........बस तुमसे एक ही गुजारिश है मेरे प्रिय कि तुम कहीं भी रहो , कहीं भी जा बस खुश रहो हमेशा मुस्कुराओ मुझे बहुत अच्छा लगेगा ,,,,,,हाँ प्रिय तुम मेरे हो सिर्फ मेरे ही लेकिन मेरे लिए तो तुम्हारा होना भर ही काफी है ,,,,,,तुम्हें देख लेना ही मेरे लिए खुशी का कारण बन जाता है ,,,मैं उदासी में भी मुस्कुरा देती हूँ मेरे दिल की धड़कनें बढ़ जाती हैं खून का बहाव तेज हो जाता है और मेरे बेजान से जिस्म में जान आ जाती है मेरे प्रिय मेरी  सारी खुशियां सिर्फ तुमसे हैं और शायद दुख भी.................प्रिय
क्या तुम जानते हो कि जब तुम सामने से दिख जाते हो तो दिल को एक अलग से किस्म का सकूँ आ जाता है मेरी बेचैनी घबराहट परेशानी और तकलीफ़ें न जाने कहाँ छूमंतर हो जाती हैं ....न जाने कहाँ बिला जाती हैं ? भले ही तुम मुझे देख पा रहे हो या नहीं फिर भी ऐसा अहसास क्यों होता है कि तुम भी मुझे सामने से एकटक देख रहे हो, निहार रहे हो, बिन बोले बिन कुछ कहे बस मुझे देखे जा रहे हो जैसे मैं तुम्हें देख रही हूँ ठीक बिलकुल वैसे ही ,,,जैसे मैं मुस्कुरा रही हूँ ठीक वैसे ही तुम भी हँस रहे हो ....जैसे मैं खुश हो जाती हूँ तुम्हें देख कर ठीक वैसे ही तुम भी खुश हो रहे हो ,,,,,तुम्हारी तेज धड़कने मेरी ही तरह से तेज होकर धडक रही हैं .....गुनगुना उठते हो कोई गीत मेरी ही तरह से ......लेकिन प्रिय मैं एक बार तुम्हें छूना चाहती हूँ ...मैं तुम्हारा हाथ पकड़ कर उस सड़क पर चलना चाहती हूँ जहां पर फिसलन है, मैं तुम्हें एक बार कस कर अपने गले से लगा लेना चाहती हूँ और चूम लेना चाहती हूँ तुम्हारे गाल को .....सुनो मेरे प्रियतम यह मैं नहीं चाहती हूँ यह मेरी इच्छा नहीं है बल्कि यह प्रकृति ही ऐसा चाहती है, उसकी ही यह इच्छा है, वो समझती है हामरे दुख को हमारे दर्द को... वो वादियाँ वो फिज़ाएँ हमें एक बार फिर से पूरी तरह से एक दूसरे के प्रति समर्पित होते हुए देखना चाहती हैं, वो देव बड़ी अकुलाहट से भर कर प्रतीक्षा रत हैं हमारे आगमान को लेकर...तो मेरे प्रिय सुनो न ,,,तो आओ न लौट चले एक बार फिर से उसी समर्पित प्रेम के साथ प्रकृति के आगोश में भुला कर सब कुछ,,, दुनियाँ के सब रीति रिवाजों से दूर जाकर जहां पर सुबह सबसे पहले हो और रात तारों से भरी हो ...... आओ प्रिय मिटा दो मेरे सब भ्रम .....आओ ॥
नहीं मिलता किसी को प्रेम इतनी आसानी से
दिल के सब बैर मिटा कर सच होना होता है
फूल यूं ही नहीं खिल जाते हैं उपवन में
माली को नियम से पानी देना होता है 
मन ही मन जपना होता है उस प्रिय का नाम
अपनी सच्ची लगन से
तब कहीं दिल को दिल के आगोश में
जाकर सिमटना होता है !!
सीमा असीम

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