प्रेम

जिसे हम पीड़ा कहते हैं,उसका जीने या मरने से कोई सम्बन्ध नहीं होता ।उसका धागा प्रेम से जुड़ा होता है ,वह खिंचता है तो दर्द की लहरउठती है ।"

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