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शब्द

 अब अगर ख़ुशी लिखी जाए  तो जरूरी तो नहीं कि  सुख में ही लिखी जाए  उदास चेहरे से या  निराशा में भी तो  ख़ुशी लिखी जा सकती है  ख़ुशी पर कोई कविता  ख़ुशी पर कोई कहानी या फिर  खुशी पर कोई गीत  हां यह अलग बात है कि  खुशी लिखते लिखते  सचमुच ही खुशी आ जाए  सुख जाए और  हताशा भरे पलों में चेहरे पर  प्यारी सी मुस्कुराहट खिल जाए कि  शब्द मात्र शब्द नहीं होते बल्कि  शब्दों के भी वजूद होते है  कहते भी तो हैं न कि शब्द ब्रह्म होते हैं और  यह बात अक्षरसा सत्य है या  फिर सत्य हो जाती है  चाहे शब्द बोले जाए या फिर शब्दों को लिखा जाए  है ना... सीमा 
 दो मैग्गी बनवा लेते हैं ना  तुम भी मैगी तो खाओगे  कितनी शीतल सुंदर तो हवा चल रही है और  इस पहाड़ी इलाके में अगर जाकर पहाड़ी मैगी नहीं खाई तो क्या फायदा  है ना  यार तू ऐसा कर और यह कहते कहते  नयी नवेळी सिंदूर सजी मांग को देखते हुए  माथे पर एक चुम्बन ले लिया वो शरमा गयी फिर मुस्कुराते हुए बोली क्या करते हो सब देख रहे हैं हमें यहाँ पर  यह पहाड़ यह वादियाँ यह घटाएं और... और कौन?  कोई नहीं, अच्छा चलो बताओ मैगी का आर्डर करूँ.. मुझे तो यहाँ पर बहुत अच्छा लग रहा है  सोचता हूँ मैं यहीं पर रह जाऊं  बात को घुमाओ मत, बोलो न, क्या खाना है? एक मैगी और एक भेलपुरी ले लेते हैं  पहाड़ और अपनी मुंबई की चौपाटी को मिक्स अप करके खाएंगे  क्या ही मजा आएगा  इस जन्नत में बैठकर खाने का. दीवानगी भरी नजरों से अपनी नव विवाहिता को देखते हुए कहा... कि अचानक से एक व्यक्ति आया  आते ही उसने एक सवाल दागा  सुनो कौन हो तुम  हिंदू या मुसलमान  हम हिंदुस्तान में रहते हैं  तो हिंदू हैं यह गर्व से कहते हैं  अच्छा तो तुम गोली ख...