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Showing posts from August, 2021
 मैं तुम पर बहुत ज्यादा विश्वास करती हूं हद से ज्यादा कोई एक बात भी अपने मन में नहीं रखती सारी बातें मैं तुमसे कह देती हूं दिल में कुछ रहता ही नहीं है मेरे तुम्हारे सिवा कुछ यहां तक कि जो भी बात मुझसे कोई कुछ कहता है वह भी मैं तुम्हें बता देती हूं मैं कभी कुछ तुमसे छुपाना ही नहीं चाहती मैं बार-बार तुम्हें जताना चाहती हूं लेकिन जब तुम मेरे विश्वास को ठेस पहुंचाते हो उसे झूठ बोलते हो कोई भी एक बात वह चीज मुझे रुलाती रहती है बरसो बरसो दिन रात सुबह दोपहर जब भी वह चीज भी रहती है दिल में और वह मुझे रुलाती है कि तुमने मुझसे झूठ बोला..मुझे सच भी तो कह सकते थे  हर बार वही झूठ को अधूरा ना बार-बार उसे झूठ को कहना इतनी सफाई के साथ कहना मैंने तो तुमसे कभी कोई सफाई नहीं मांगी तुम अगर मुझे कोई बात बता भी रहे हो तो सच बताओ झूठ बताने का क्या मतलब बनता है उसे छुपाने का क्या मतलब बताएं मैं तो तुमसे पैसे भी हमेशा ही तुम्हारी हूं तुम्हें प्रेम करती हूं हद से ज्यादा करती हूं कोई नहीं कर सकता इतना तुम्हें प्रेम  पवित्र और सच्चा प्रेम उसमें नाम मात्र को भी कोई मिलावट नहीं है प्रेम में इतना पारदर...
घर पर बात हो जाने से मन में संतुष्टि का भाव आ गया था ना अभी तो बहुत फिक्र लगी हुई थी कि घर पर सब परेशान हो रहे होंगे खैर अब बात हो गई तो अब जाकर आराम से हम सो सकते हैं क्योंकि सोनू अगर नहीं सोएंगे तो अगले दिन उठ नहीं पाएंगे और हमारी थकान कम नहीं होगी  बिस्तर पर लेटते ही नींद में आकर बसेरा डाल दिया और हम गहरी नींद में सो गए आंख सुबह 6:00 बजे के करीब खुली तो देखा पहाड़ों से दूर छन छन के हमारी टेंट के अंदर आ रही है मैंने उसके बाहर निकल आई जब मैं इतनी दूर आई हूं तो इस प्रेशियस को क्यों ना महसूस किया जाए और यहां के वातावरण को क्यों ना महसूस किया जाए आंखों क्यों ना जिया जाए केवल हम देखने के लिए सोने के लिए आराम उठाने के लिए तो नहीं आए थे ना  सूर्य देव भगवान पहाड़ों पर आराम से उतरते जा रहे थे मानव पहाड़ ऊपर अधूरे नीचे आ गया हो नदी की कलकल की आवाज कानों में आ रही थी सामने ही तो नदी है कितनी सीट मिली थी टेंट और सड़क के उस पार नदी बीच में नदी ही थी थोड़ा सा नीचे उतर कर जाओ तो सड़क को पार करके जा और नदी सामने दिख रही थी अभी तो खैर नहीं नदी हम थोड़ी देर बाद जाएंगे थोड़ा धूप निकल आए और अच्...
 सनम तुम न करना कभी बेवफाई मुझसे भले ही पिला देना जहर का प्याला क्योंकि नहीं जी पाऊँगी मैं बिन तुम्हारे या होकर तुमसे जुदा मैं कि हूँ मैं सिर्फ ही और तुम्हें मानती हूँ सिर्फ अपना हाँ तुम मेरे ही हो सिर्फ मेरे तभी तो चलती हैं हमारी स्वांस साथ साथ धड़कती है धड़कन साथ साथ और हो तुम मेरे जैसे ही जैसे मैं बन गयी हूँ तुम्हारे जैसी... सीमा असीम