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तुम्हारा मुसकुराना
 नमन के दादा और दादी ने अपने जवानी के दिनों को याद करके का सोचा। उन्होंने फैसला किया कि हम फिर से दरिया के किनारे मिलेंगे जहाँ हम पहली बार मिले थे। दादा सुबह जल्दी उठकर तैयार होकर गुलाब लेकर पहुँच गए पर दादी नहीं आयी। दादा जी गुस्से में घर पहुंचकर बोले,"तुम आयी क्यों नहीं, मैं इंतज़ार करता रहा तुम्हारा?" दादी ने भी शर्मा के जवाब दिया,"माँ ने जाने ही नहीं दिया।" नमन  हैरान ........  
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न कोई है न कोई था   जिंदगी में तुम्हारे सिवा   तुम देना साथ मेरा   ओ हमनवाज ओ मेरे हमनवाज सुनो प्रिय              मैं तुम्हारी हूँ और सिर्फ तुम्हारी ........बस तुमसे एक ही गुजारिश है मेरे प्रिय कि तुम कहीं भी रहो , कहीं भी जा बस खुश रहो हमेशा मुस्कुराओ मुझे बहुत अच्छा लगेगा ,,,,,, हाँ प्रिय तुम मेरे हो सिर्फ मेरे ही लेकिन मेरे लिए तो तुम्हारा होना भर ही काफी है ,,,,,, तुम्हें देख लेना ही मेरे लिए खुशी का कारण बन जाता है ,,, मैं उदासी में भी मुस्कुरा देती हूँ मेरे दिल की धड़कनें बढ़ जाती हैं खून का बहाव तेज हो जाता है और मेरे बेजान से जिस्म में जान आ जाती है मेरे प्रिय मेरी   सारी खुशियां सिर्फ तुमसे हैं और शायद दुख भी.................प्रिय क्या तुम जानते हो कि जब तुम सामने से दिख जाते हो तो दिल को एक अलग से किस्म का सकूँ आ जाता है मेरी बेचैनी घबराहट परेशानी और तकलीफ़ें न जाने कहाँ छूमंतर हो जाती हैं ....न जाने कहाँ बिला जाती हैं ? भले ही तुम मुझे देख पा रहे हो या नहीं फिर...