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         मुझे अपना तीसरा कहानी संग्रह आप लोगों के हाथों में सौपते हुए बेहद ख़ुशी का अनुभव हो रहा है ! कदम दर कदम चलते हुए ना जाने कैसे यहाँ तक का सफ़र तय कर लिया ! वैसे देखा जाये तो अगर हमारी नीयत साफ़ हो और रास्ता सीधा सच्चा हो तब सफ़र में रहकर भी सफ़र का पता ही नहीं चलता कि हम कितना सफ़र पूरा कर चुके, भले ही हमारे साथ कोई हो या न हो  !  यकीन मानों मेरे प्रिय पाठकों, मैंने अपने बुलंद हौसले के साथ बिन पंखों के सिर्फ एक उडान भर भरी थी, आसमां को छूने की, वैसे जीवन में बस एक उडान ही तो काफी होती है अंतरिक्ष, अनंत आकाश और ब्रह्मांड में बिचरने को, कई कई युगों तक !     इस संग्रह की मेरी हर कहानी या किस्सा को गड़ते हुए मैंने पूरी तरह उसमें डूबकर, उसे अपनी अंतरात्मा में आत्मसात करके, उसी को जीते हुए ढाल दिया है ! जैसे कोई चिड़िया अण्डों पर बैठकर उन्हें सेती है, ठीक वैसे ही मैंने इन कहानियों को जन्मा फिर अपनी ही आलोचनात्मक नजरों से सेते हुए इन्हें कागज पर उकेर दिया ताकि यह अपने पंख पसारकर क्षितिज तक हो आये, घूम आये सारा जहाँ और नभ को छू आये !  ह...